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परतावल में गंगा की बेटी का जीवन बचाने की अद्भुत कहानी

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परतावल में गंगा की बेटी का जीवन बचाने की अद्भुत कहानी

7.2 फीट लंबी गंगा डॉल्फिन का सफल रेस्क्यू: चुनौती इसलिए भी बड़ी थी क्योंकि डॉल्फ़िन गर्भवती थी और कई दिनों से सीमित जल क्षेत्र में फँसी हुई थी। ऐसे में उसे सुरक्षित निकालना और बिना किसी चोट के उपयुक्त प्राकृतिक आवास तक पहुँचाना अत्यंत सावधानी का कार्य था।

परतावल में गंगा की बेटी का जीवन बचाने की अद्भुत कहानी

हरेन्द्र नारायण सिंह 

(Lions International Faculty, HAM Radio Licensee, Naturist, Member SPHEEHA, Trekker & Mountaineer)

7.2 फीट लंबी गंगा डॉल्फिन का सफल रेस्क्यू

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के परतावल बाज़ार क्षेत्र में एक अत्यंत संवेदनशील और सराहनीय वन्यजीव बचाव अभियान ने पर्यावरण संरक्षण की एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की जुलाई 2026 में । कई दिनों से एक नहर में फँसी लगभग 7.2 फीट लंबी और करीब 147 किलोग्राम वजनी गर्भवती गंगा डॉल्फिन जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही थी। समय पर मिली सूचना और विभिन्न विभागों के सामूहिक प्रयासों ने अंततः उसका जीवन बचा लिया।

गंगा डॉल्फिन केवल एक दुर्लभ जलीय जीव नहीं, बल्कि गंगा नदी तंत्र के पारिस्थितिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण सूचक प्रजाति है। इसलिए इस डॉल्फिन का बचाव केवल एक जीव को बचाने की घटना नहीं, बल्कि हमारी नदियों और जलीय जैव-विविधता के संरक्षण का महत्वपूर्ण प्रयास था।

डॉल्फिन के नहर में फँसे होने की सूचना मिलने के बाद उत्तर प्रदेश वन विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर, टर्टल सर्वाइवल अलायंस (TSA) फाउंडेशन, सिंचाई विभाग तथा स्थानीय पुलिस ने आपसी समन्वय के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया। चुनौती इसलिए भी बड़ी थी क्योंकि डॉल्फ़िन गर्भवती थी और कई दिनों से सीमित जल क्षेत्र में फँसी हुई थी। ऐसे में उसे सुरक्षित निकालना और बिना किसी चोट के उपयुक्त प्राकृतिक आवास तक पहुँचाना अत्यंत सावधानी का कार्य था।

रेस्क्यू टीम ने विशेषज्ञों की निगरानी में डॉल्फिन को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद उसके सुरक्षित परिवहन के लिए विशेष व्यवस्था की गई। प्रशासन और पुलिस के सहयोग से लगभग 20 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, ताकि रेस्क्यू वाहन बिना अनावश्यक रुकावट के तेजी से आगे बढ़ सके। यह व्यवस्था विभिन्न सरकारी विभागों के उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण थी।

डॉल्फिन को लगभग 52 किलोमीटर की दूरी तय कर गोरखपुर में राप्ती नदी तक पहुँचाया गया और वहाँ सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया। राप्ती नदी में पहुँचने के बाद उसे अधिक अनुकूल और विस्तृत जलीय आवास प्राप्त हुआ, जहाँ उसके स्वतंत्र रूप से विचरण करने तथा सुरक्षित जीवन जीने की बेहतर संभावना बनी।

इस पूरे अभियान में शामिल उत्तर प्रदेश वन विभाग की तत्परता और नेतृत्व, गोरखपुर चिड़ियाघर एवं TSA फाउंडेशन के विशेषज्ञ सहयोग, सिंचाई विभाग की सक्रिय भूमिका तथा स्थानीय पुलिस और प्रशासन द्वारा बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर के लिए विशेष प्रशंसा की जानी चाहिए। सभी संबंधित विभागों ने यह साबित किया कि जब सरकारी संस्थाएँ, विशेषज्ञ संगठन और स्थानीय प्रशासन एक उद्देश्य के लिए एकजुट होकर कार्य करते हैं, तो कठिन से कठिन वन्यजीव संरक्षण अभियान भी सफल हो सकता है।

यह घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि हमारी नदियाँ केवल पानी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि असंख्य जीव-जंतुओं का घर हैं। गंगा डॉल्फ़िन का संरक्षण नदी के संरक्षण से सीधे जुड़ा हुआ है। नदियों में प्रदूषण कम करना, प्राकृतिक प्रवाह बनाए रखना, अवैध शिकार रोकना और जलीय जीवों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

जुलाई 2026 का परतावल डॉल्फिन रेस्क्यू अभियान मानव संवेदनशीलता, विभागीय समन्वय और वन्यजीव संरक्षण की एक ऐसी कहानी है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। एक गर्भवती डॉल्फिन को नया जीवन देकर इन विभागों ने केवल एक जीव की रक्षा नहीं की, बल्कि उसके गर्भ में पल रहे एक संभावित नए जीवन को भी सुरक्षित किया।

इस उल्लेखनीय बचाव अभियान में योगदान देने वाले सभी अधिकारियों, वन्यजीव विशेषज्ञों, कर्मचारियों, पुलिसकर्मियों तथा स्थानीय सहयोगियों को हार्दिक बधाई एवं साधुवाद। यह प्रयास निश्चित रूप से “प्रकृति के साथ संवेदना और विकास के साथ संरक्षण” की भावना को मजबूत करता है।

 

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