Thinking Point
दिल्ली में यमुना की सफाई और डिसिल्टिंग के प्रयासों से नदी को उसके पुराने स्वरूप में लौटाने की पहल हो रही है। फिर आगरा की यमुना के साथ सौतेला व्यवहार क्यों? क्या ताजमहल के शहर की जीवनरेखा को यूं ही दम तोड़ने दिया जाएगा?
आज शाम यमुना आरती स्थल पर आयोजित रिवर कनेक्ट कैंपेन की गोष्ठी में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से मांग की गई कि आगरा में भी यमुना को पुनर्जीवित करने के लिए दिल्ली की तर्ज पर ठोस और समयबद्ध अभियान शुरू किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यमुना की सफाई और डिसिल्टिंग के प्रयास हो रहे हैं। इसी तरह आगरा में भी नदी की सफाई, गाद निकालने और जलधारण क्षमता बढ़ाने पर गंभीरता से काम होना चाहिए।
डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने कहा कि यमुना नदी की वैज्ञानिक तरीके से डिसिल्टिंग कराई जाए। नदी में जमा गाद और प्रदूषित तत्वों को बाहर निकाला जाए। इससे नदी की जलधारण क्षमता बढ़ेगी और पानी के प्राकृतिक प्रवाह को भी मदद मिलेगी। केवल कागजी योजनाओं और घोषणाओं से नदी का उद्धार नहीं होगा।
निधि पाठक और रंजन शर्मा ने यमुना के पुनर्जीवन के लिए व्यापक जनांदोलन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि जब तक शहर का आम नागरिक इस अभियान से नहीं जुड़ेगा, तब तक सरकारी मशीनरी पर अपेक्षित दबाव नहीं बनेगा।
राहुल राज और दीपक राजपूत ने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को जगाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जनप्रतिनिधि कब तक सोते रहेंगे? रंजन शर्मा ने पूछा कि यमुना की दुर्दशा उनकी प्राथमिकताओं में क्यों नहीं है? चुनाव के समय नदी और शहर के विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में सब कुछ ठंडे बस्ते में चला जाता है।
शहतोश गौतम ने यमुना पर बैराज निर्माण का काम शीघ्र शुरू कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि आगरा में नदी के अस्तित्व और भविष्य के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता बेहद जरूरी है। पद्मिनी अय्यर ने कहा कि बैराज निर्माण और जल प्रबंधन की ठोस व्यवस्था के बिना यमुना को सालभर जीवंत बनाए रखना मुश्किल होगा।
गोष्ठी में सदस्यों ने नाराजगी जताई कि आखिर कब तक आगरा की जनता को उम्मीदों और वायदों के सहारे छला जाता रहेगा? यमुना कभी आगरा की पहचान, संस्कृति और अर्थव्यवस्था का आधार थी। आज वही नदी गंदगी, गाद और घटते जलप्रवाह की मार झेल रही है। ताजमहल के किनारे बहती यमुना की बदहाली शहर की छवि पर भी सवाल खड़े करती है।
जनजागरण अभियान होगा तेज
रिवर कनेक्ट कैंपेन ने तय किया कि यमुना को जनचर्चा और जनआंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों से संपर्क और संवाद का सिलसिला शीघ्र शुरू किया जाएगा। चतुर्भुज तिवारी ने कहा कि युवाओं, विद्यार्थियों, पर्यावरण प्रेमियों और शहर के प्रबुद्ध नागरिकों को अभियान से जोड़ने की कोशिश होगी।
संयोजक बृज खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि यमुना की लड़ाई किसी एक संस्था या व्यक्ति की लड़ाई नहीं है। यह आगरा के भविष्य, पर्यावरण, स्वास्थ्य और विरासत की लड़ाई है। सरकार को अब आश्वासनों से आगे बढ़कर जमीन पर काम दिखाना होगा।
संदेश साफ है: दिल्ली की यमुना बदल सकती है, तो आगरा की यमुना क्यों नहीं?
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