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ट्रीटेक नेटवर्क
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (यूपी-एनसीआर) एवं लखनऊ तथा कानपुर में वायु प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु किए जा रहे उपायों तथा अब तक की प्रगति की समीक्षा के उद्देश्य से २३ दिसम्बर को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्यालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश डॉ0 अरुण कुमार सक्सेना द्वारा की गई। सक्सेना द्वारा सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वायु प्रदूषण के सभी संभावित स्रोतों पर स्पष्ट एवं समयबद्ध एक्शन प्लान तैयार कर समन्वित, त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चत की जाए, जिससे प्रदेशवासियों को स्वच्छ एवं बेहतर वायु गुणवत्ता उपलब्ध कराई जा सके। बैठक के दौरान अवगत कराया गया कि (यूपी एनसीआर) क्षेत्र में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न विभागों द्वारा कुल २५६ टीमों के माध्यम से निरंतर निरीक्षण एवं प्रवर्तन की कार्यवाही की जा रही है। सड़कों से उत्पन्न धूल के नियंत्रण हेतु 58 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों, 332 वॉटर स्प्रिंकलरों तथा 358 एंटी-स्मॉग गन के माध्यम से नियमित कार्य किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न विभागों द्वारा कुल 3460 किलोमीटर सड़क मार्ग को पुनर्विकास एवं सुधार हेतु चिन्हित किया गया है। जिससे धूल जनित प्रदूषण में प्रभावी कमी लाई जा सके। वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सघन जांच अभियान चलाकर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने हेतु ई-बस सीएनजी बस एवं बीएस-६ मानक आधारित बसों के संचालन को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा ई-वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ई-व्हीकल चार्जिग अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया गया है। इसके अतिरिक्त पार्किग व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा सुगम यातायात सुनिश्चत करने के लिए आईटीएमएस के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गयी। बैठक में बोर्ड के अध्यक्ष डॉ0 आर0पी0 सिंह ने बताया कि सभी औद्योगिक इकाइयों को ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम की स्थापना सुनिश्चित करने हेतु आदेश जारी किया जा चुका है, जिससे औद्योगिक उत्सर्जनों की सतत निगरानी सुनिश्चत हो सके तथा पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से अनुपालन किया जा सके। बैठक के दौरान यूपीएनसीआर क्षेत्र सहित लखनऊ एवं कानपुर जनपदों में वायु गुणवत्ता के आँकड़ों की प्रस्तुत करते हुए वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतो जैसे सड़कों एवं खुले क्षेत्रों से उड़ने वाली धूल, वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण एवं विध्वंस कार्य, कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट एवं बायोमास जलाने पर रोकथाम एवं उल्लंघन की स्थिति में सख्त प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
यूपी के टाइगर रिजर्व, रामसर साइट्स सहित कई वेटलैंड के एकीकृत विकास के निर्देश
उत्तर प्रदेश में इको टूरिज्म के अंतर्गत कराए जा रहे विभिन्न कार्य और गतिविधियों के मद्देनजर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार अरुण कुमार सक्सेना की संयुक्त बैठक 12 दिसंबर को गोमती नगर स्थित पर्यटन निदेशालय में संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश के चारों टाइगर रिजर्व, 10 रामसर साइट्स सहित कई वेटलैंड के एकीकृत विकास के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही आगामी वर्षों में प्रदेश को वाइल्ड लाइफ टूरिज्म हब के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन का भविष्य तेजी से नए आयाम गढ़ रहा है इसी बदलते परिदृश्य में समग्र पर्यटन विकास, रिस्पांसिबल टूरिज्म और वन एवं पर्यावरण विभाग के सहयोग की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हमें समस्या नहीं, समाधान की ओर बढ़ना है, इसी सोच के साथ प्रदेश में पर्यटन विकास को अब एकीकृत और भविष्य केंद्रित रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। बैठक में उत्तर प्रदेश के दुधवा, पीलीभीत, अमानगढ़, रानीपुर टाइगर रिजर्व और 10 रामसर साइट्स नवाबगंज पक्षी अभ्यारण्य (उन्नाव), पार्वती आर्गा पक्षी अभ्यारण्य (गोंडा), समान पक्षी अभ्यारण्य (मैनपुरी), समसपुर पक्षी अभ्यारण्य (रायबरेली), सांडी पक्षी अभ्यारण्य (हरदोई), सरसई नावर झील (इटावा), सूर सरोवर पक्षी विहार (आगरा), ऊपरी गंगा नदी (ब्रजघाट से नरौरा विस्तार), बखिरा वन्यजीव अभ्यारण्य (संत कबीर नगर) और हैदरपुर वेटलैंड (मुजफ्फरनगर) को विश्वस्तरीय इको टूरिज्म मॉडल के रूप में विकसित करने पर केंद्रित चर्चा हुई। इन स्थलों पर आधारभूत संरचना प्रवेश द्वार, नेचर ट्रेल, वॉच टावर, साइनेज, कॉटेज, कैंटीन, गजीबो, स्वागत कक्ष और आरओ सहित अन्य सुविधाओं के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए समुचित वित्तपोषण की आवश्यकता को विस्तृत रूप से रखा गया। बैठक में इको टूरिज्म गाइड, ड्राइवर और हॉस्पिटैलिटी स्टाफ के प्रशिक्षण, पर्यटन स्थलों पर बेहतर साइनेज लगाने और वन विभाग की सहमति से कंसल्टेंट नियुक्त करने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी विमर्श हुआ। उत्तर प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 में इको-टूरिज्म को नई दिशा देने जा रही है। प्रदेश के महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्थलों को विकसित करने की योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है, जिनमें बरेली के नगर वन और कन्नौज के लाख बहोसी पक्षी विहार को विशेष रूप से उन्नत रूप में संवारने की तैयारी है। बैठक में बर्ड सर्किट सूर सरोवर (आगरा), शेखा झील (अलीगढ़), रपड़ी वेटलैंड (फिरोजाबाद), सरसई नावर (इटावा) तथा लाख बहोसी वेटलैंड (कन्नौज) के समग्र विकास पर भी विस्तृत चर्चा की गई, ताकि इन स्थलों को ‘वन डेस्टिनेशन फॉर टूरिस्ट्स’ के रूप में विकसित किया जा सकता है। प्रदेश में वेटलैंड आधारित पर्यटन को नई दिशा देने के लिए पर्यटन विभाग और वन विभाग ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन वेटलैंड’ मॉडल पर व्यापक योजना तैयार कर रहे हैं। इसी के अंतर्गत 52 वेटलैंड को चिह्नित किया गया है। इनके समग्र प्रोजेक्शन और उन्हें एकीकृत पर्यटन सर्किट के रूप में संवर्धित करने पर सहमति बनी। जनपद चंदौली स्थित राजदरी-देवदरी वाटरफॉल में ईको टूरिज्म अवस्थापना सुविधाओं के ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस के संबंध में चर्चा, वन विभाग के सहयोग से किसी एक रामसर साइट्स पर महोत्सव (बर्ड फेस्टिवल) के आयोजन आदि विषयों पर भी विमर्श हुआ। गोरखपुर प्राणी उद्यान में एम्पीथियेटर, कैंटीन, पार्किंग सहित अन्य अवसंरचना के विकास पर गहनता से चर्चा हुई। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश डॉ0 अरुण कुमार ने कहा उत्तर प्रदेश के समृद्ध वन्य जीवन और प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करते हुए उसे वैश्विक स्तर पर पर्यटन आकर्षण के रूप में प्रस्तुत करना हमारा मूल उद्देश्य है। इको टूरिज्म न केवल स्थानीय समुदायों को रोजगार से जोड़ता है, बल्कि प्रकृति संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी भी मजबूत करता है। टाइगर रिजर्व, रामसर साइट्स और राज्य के प्रमुख वेटलैंड्स में चल रहे विकास कार्यों से प्रदेश को ‘वाइल्ड लाइफ टूरिज्म हब’ बनाने की दिशा में नई ऊर्जा मिली है। वन विभाग समन्वय के साथ पर्यटन विभाग के प्रयासों को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि उत्तर प्रदेश प्रकृति-आधारित पर्यटन का राष्ट्रीय मॉडल बन सके। वन विभाग की ओर से दिल्ली-एनसीआर से सटे ओखला बर्ड सैंक्चुअरी में साइनेज लगाने के सुझाव और ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर पक्षी विहार में पर्यटक सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव रखा गया। पर्यटन मंत्री ने इस पर सहमति जताई। इन दोनों स्थलों पर बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं, इसलिए उक्त दोनों स्थलों का विकास हमारी प्राथमिकता है।
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Tree TakeJan 13, 2026 04:12 PM
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