A First-Of-Its-Kind Magazine On Environment Which Is For Nature, Of Nature, By Us (RNI No.: UPBIL/2016/66220)

Support Us
   
Magazine Subcription

जल-व्याघ्र है दुनिया का सबसे रहस्यमय जीव

TreeTake is a monthly bilingual colour magazine on environment that is fully committed to serving Mother Nature with well researched, interactive and engaging articles and lots of interesting info.

जल-व्याघ्र है दुनिया का सबसे रहस्यमय जीव

यह जीव दिखने में इतना छोटा होता है कि इसे नग्न आँखों से देखना भी मुश्किल है, लेकिन इसकी शक्तियां किसी जादू से कम नहीं हैं। आम बोलचाल की भाषा में कहें तो यह जीव कभी मर ही नहीं सकता...

जल-व्याघ्र है दुनिया का सबसे रहस्यमय जीव

TidBits
ट्रीटेक नेटवर्क 
हमारे महासागरों की गहराइयों में एक ऐसा जीव रहता है जिसे देखकर वैज्ञानिक आज भी अपना सिर खुजलाते हैं। हम बात कर रहे हैं ऑक्टोपस यानी अष्टबाहु की, लेकिन इससे भी ज्यादा रहस्यमयी एक छोटा सा जीव है जिसे समुद्री अमर जीव या जल-व्याघ्र कहा जाता है। यह जीव दिखने में इतना छोटा होता है कि इसे नग्न आँखों से देखना भी मुश्किल है, लेकिन इसकी शक्तियां किसी जादू से कम नहीं हैं। आम बोलचाल की भाषा में कहें तो यह जीव कभी मर ही नहीं सकता। जब भी यह बूढ़ा होता है या बीमार होता है, तो यह अपने शरीर की कोशिकाओं को दोबारा नया कर लेता है और फिर से एक बच्चे के रूप में बदल जाता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई बूढ़ा इंसान अचानक से फिर से नवजात बच्चा बन जाए। इस जीव का रहस्य यहीं खत्म नहीं होता। इसके पास दिमाग नहीं होता, दिल नहीं होता, फिर भी यह पूरी सूझबूझ से शिकार करता है। यह ठंडे से ठंडे बर्फ के पानी में और उबलते हुए गर्म पानी के झरनों में भी आराम से रह सकता है। वैज्ञानिकों ने जब इसे अंतरिक्ष के शून्य वातावरण में भेजा, जहाँ कोई भी जीव एक सेकंड भी जिंदा नहीं रह सकता, वहाँ भी यह जीव कई दिनों तक मजे से जीवित रहा। इस जीव के भीतर का रसायन विज्ञान इतना जटिल है कि आज की आधुनिक तकनीक भी इसके रहस्यों को पूरी तरह नहीं सुलझा पाई है। यह हमारी धरती पर रहने के बावजूद किसी दूसरी दुनिया का प्राणी लगता है। इसकी यही बातें इसे इस ब्रह्मांड का सबसे अनोखा और रहस्यमयी जीव बनाती हैं जो हमारी कल्पनाओं से भी परे है।
समुद्री सिंह और उनका तनाव प्रबंधन
समुद्री सिंह, जिन्हें पानी की दुनिया के सबसे चंचल और सामाजिक जीवों में गिना जाता है, अपने दैनिक जीवन में भारी मानसिक और शारीरिक दबाव का सामना करते हैं। विशाल महासागरों में लगातार शिकारियों से खुद को बचाना, बदलते मौसम में भोजन की तलाश करना और अपने कुनबे की रक्षा करना उनके लिए अत्यधिक तनाव पैदा करता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि इन विपरीत परिस्थितियों में भी समुद्री सिंह अपने मानसिक संतुलन को बनाए रखने के लिए कुछ बेहद विशिष्ट और शुद्ध प्राकृतिक तौर-तरीकों का उपयोग करते हैं जिन्हें देखकर इंसान भी बहुत कुछ सीख सकते हैं। जब भी कोई समुद्री सिंह किसी शिकारी के हमले से बचकर निकलता है, तो उसका शरीर तीव्र तनाव की स्थिति में होता है। इससे उबरने के लिए वह तुरंत पानी से बाहर निकलकर किसी सूखी चट्टान या रेतीले तट पर आ जाता है। वहाँ पहुँचकर वह सबसे पहले अपने पूरे शरीर को बहुत तेजी से झटकता है। विज्ञान के अनुसार, शरीर को इस तरह कंपायमान करने से मांसपेशियों में जमा हुआ तनाव और हानिकारक रसायन तुरंत बाहर निकल जाते हैं। इसके पश्चात, वे एक दूसरे के अत्यंत समीप लेट जाते हैं। इस सामाजिक स्पर्श और आपसी शारीरिक गरमाहट से उनके मस्तिष्क में शांति देने वाले रसायनों का स्राव होता है। वे गहरी और लंबी सांसें लेते हैं, जो उनके हृदय की गति को सामान्य बनाती हैं। विपरीत परिस्थितियों में शांत रहने की उनकी यह क्षमता उन्हें गहरे समुद्र के थपेड़ों के बीच भी स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखती है।
दुनिया का सबसे समर्पित माता-पिता जोड़ा
प्राणी जगत में अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए माता-पिता का समर्पण देखने लायक होता है, लेकिन अंटार्कटिका की जमा देने वाली बर्फ के बीच रहने वाले सम्राट पेंगुइन का जोड़ा इस मामले में दुनिया में सबसे अव्वल माना जाता है। यहाँ माता और पिता दोनों मिलकर अपने होने वाले बच्चे के लिए जो त्याग करते हैं, उसकी मिसाल पूरी दुनिया में कहीं और नहीं मिलती। जब शून्य से भी चालीस डिग्री नीचे के तापमान में बर्फीले तूफान चल रहे होते हैं, तब यह जोड़ा अपने अंडे को बचाने के लिए महीनों तक भूखा-प्यासा खड़ा रहता है।अंडा देने के बाद माँ पेंगुइन भोजन की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर दूर समुद्र की तरफ निकल जाती है। इस दौरान पिता पेंगुइन उस अंडे को अपने पैरों के ऊपर एक विशेष थैली में छुपाकर रखता है ताकि वह बर्फ को न छुए। दो महीने तक पिता पेंगुइन बिना हिले-डुले, बिना कुछ खाए, केवल उस अंडे को गर्मी देता है। जब बर्फीली हवाएं चलती हैं, तो हजारों पिता पेंगुइन एक गोल घेरा बना लेते हैं और बारी-बारी से घेरे के बीच में आते हैं ताकि सबको थोड़ी राहत मिल सके। जब बच्चा अंडे से बाहर आता है, ठीक उसी समय माँ पेंगुइन समुद्र से भोजन लेकर लौटती है। इसके बाद पिता पेंगुइन अपनी बारी के भोजन के लिए समुद्र की ओर जाता है। महीनों का यह कठिन चक्र और एक-दूसरे के प्रति अटूट विश्वास ही इस जोड़े को इस धरती का सबसे समर्पित और आदर्श माता-पिता बनाता है।
पेड़ों का गुप्त नेटवर्क और आपसी सहयोग
शायद सबसे जादुई और विस्मयकारी रहस्य हमारे घने जंगलों के विशाल पेड़ों के नीचे छिपा हुआ है। सालों तक इंसान यही समझता रहा कि पेड़ अकेले खड़े रहते हैं और संसाधनों के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं। लेकिन आधुनिक वनस्पति विज्ञान ने यह साबित कर दिया है कि एक जंगल के सभी पेड़ जमीन के नीचे आपस में जुड़े होते हैं और एक-दूसरे से बातचीत भी करते हैं। इसे जंगलों का अपना एक गुप्त सूचना तंत्र कहा जा सकता है जो पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से काम करता है। यह नेटवर्क मिट्टी के भीतर फैले हुए विशेष कवक के धागों के माध्यम से काम करता है। जब जंगल के किसी एक पेड़ पर कीड़ों का हमला होता है, तो वह जड़ों के इस जाल के माध्यम से रासायनिक संकेत भेजकर आस-पास के अन्य पेड़ों को सचेत कर देता है। संदेश मिलते ही पड़ोसी पेड़ अपने पत्तों में एक विशेष रसायन बनाना शुरू कर देते हैं जिससे वे कीड़ों के लिए कड़वे और बेस्वाद हो जाते हैं। इतना ही नहीं, यदि जंगल का कोई पुराना और विशाल पेड़ मरने वाला होता है, तो वह अपनी बची हुई ऊर्जा और पोषक तत्वों को जड़ों के इसी रास्ते से युवा और कमजोर पौधों की तरफ स्थानांतरित कर देता है। पेड़ हमें सिखाते हैं कि सामूहिक सहयोग और आपसी जुड़ाव ही इस पूरी सृष्टि की सबसे बड़ी ताकत है।
 

Leave a comment