Green Update
ट्रीटेक नेटवर्क
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान‘ विषयक कार्यशाला का शुभारम्भ करते हुए कहा कि विकसित भारत की आधारशिला स्वच्छ पर्यावरण के माध्यम से ही सम्भ्वअ है और विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हमें संकल्प लेना होगा कि प्रत्येक नागरिक ‘एक पेड़ मां के नाम‘ अवश्य लगाएगाऋ जिसमें पेड़ लगाना ही काफी नहीं है, उसकी सुरक्षा का दायित्व भी लेना है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री की अपील के क्रम में मां की स्मति तथा मां के सम्मान में प्रदेश के समस्त 825 विकास खण्डों, 762 नगर निकायों तथा समस्त ग्राम पंचायतों में 05 करोड़ पौधों का रोपण किया गया तथा जुलाई महीने में वन महोत्सव के दौरान 35 करोड़ वक्षारोपण का महाभियान चलाया जाएगा जो मां, प्रकति तथा धरती माता के प्रति कतज्ञता ज्ञापनत करने का अवसर होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5, कालिदास मार्ग स्थित आवास परिसर में आम, कुकरैल वन में कपूर तथा इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में पारिजात का पौधा रोर्पित कर अभियान का शुभारम्भ किया, जो वर्तमान में सिटी वन के रूप में विकसित किए जा रहे हैं तथा इस कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरूण कुमार सक्सेना ने आंवला व राज्यमंत्री के0पी0 मलिक ने नीम का पौधा लगाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विश्व बैंक की सहायता से 2,741 करोड़ रुपये लागत वाली देश की प्रथम ऐर शेड आधारित परियाजेना ‘उत्तर प्रदेश क्लीन ऐर मैनेजमेन्ट प्रोजेक्ट‘ (यू0पी0 कैम्प) को लाॅन्च करके इसके लोगो व वेबसाइट का डिजिटल अनावरण किया तथा बलिया के जय प्रकाश नागरिक पक्षी विहार (सुरहाताल) को प्रदेश के 13वें व देश के 100वें रामस्र स्थल के रूप में अधिसूचित किये जाने का प्रमाण पत्र लेकर 100 नवीन आर्द्रभूमियां अधिसूचित करने की घोषणा की, जिससे देश को कुल आर्द्रभूमियों में उत्तर प्रदेश का योगदान 50 प्रतिशत हो गया है और श्रावती के गुलरा (केन नाला) को ‘बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट‘ घोषणा की जिसके साथ ही उन्होने बदलते मौसम चक्र पर चिंता जताते हुए कहा कि जल है तो कल है, वन है तो जीवन है और किसान इस अतिवष्टि व अनावष्टि का सामना कर रहे हैं तथा नदी के कैचमेन्ट एरिया में अवैध अतिक्रमण न होने देने और कुकरैल में अवैध कब्जा हटाकर बनाये गये ‘सौमित्र वन‘ के दृश्य स्तिरिकतेज तापमान को नियंत्रित करने की सफल कहानी हैं।
जैव विविधता संरक्षण ही मानव अस्तित्व का आधारः वन राज्यमंत्री
22 मई, 2026 को नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर संगोष्ठी का शुभारम्भ वन व पर्यावरण राज्यमंत्री डा0 अरूण कुमार सक्सेना ने किया। उन्होने कहा कि जैव विविधता के अभाव में मानव अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। विश्व की 16 प्रतिशत जनसंख्या होने के बाद भी हमारे प्रयासों से भारत वैश्विक प्रजातियों में 75 प्रतिशत का प्रितिनिधित्व करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतत्व में प्रदेश निरन्तर विकास पथ पर अग्रसर है। इस अवसर पर प्रतीक पोस्टर का अनावरण किया गया तथा विजेता ओ को पुरस्कत किया गया। प्रमुख सचिव वी0 हेकाली झिमोमि ने वैश्विक तापमान व कार्बन को न्यून करने तथा स्थानीय समुकाय की सहभागिता पर जोर दिया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चैधरी ने स्वागत करते हुए कहा कि हम प्राकतिक संस्कति के स्वामी नहीं, अपि तु ट्रस्टी हैं जिन्हें भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना हमारा परम दायित्व है। प्रदेश में गत 9 वर्षों के अभिनव प्रयासों से वन जैव विविधता में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।
मानव-बंदर संघर्ष नियंत्रण को अन्तरिम कार्ययोजना तैयार
माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश के गांवों व शहरों में बंदरों से उत्पन्न संघर्ष को नियंत्रित करने हेतु शासन द्वारा अन्तरिम कार्ययोजना तैयार की गई है। इस वैज्ञानिक कार्ययोजना के तहत बंदरों को आबादी क्षेत्रों में आने व भेाजन तलाशने से रोकने के लिए समस्त स्थानीय निकायों को अपने अधिकारिता क्षेत्र में कूूड़ा प्रबंधन पर ध्यान देने तथा जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस पूरी कार्ययोजना तथा बंदरों को पकड़ना सुचारू क्रियान्वयन व निगरानी हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इस जिला स्तरीय समिति में नगर आयुक्त, पुलिस आयुक्त के प्रतिनिधि, प्रभागीय वनाधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, विकास खण्ड अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ गैर राजकीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सदस्य नामित किया गया है। इस तैयार योजना के तहत संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए बंदरों को पकड़कर उन्हें विशिष्ट निरिक्षण व अजीवन सेन्टर में रखा जाएगा तथा बंदरों के उचित प्रबंधन को सुद्रृढ़ करके मानव-बंदतर संघर्ष को तैजी से न्यून किया जाएगा।
अलीगढ़ की ‘शेखा झील‘ प्रदेश का 12वां रामसर स्थल घोषित
वन व पर्यावरण राज्यमंत्री डा0 अरूण कुमार सक्सेना ने अलीगढ़ स्थित शेखा पक्षी विहार को प्रदेश के 12वें रामसर स्थल के रूप में डिजिटल अधिसूचित किये जाने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार प्रकट किया है। इस नवीन स्थल को मिलाकर अब देश में कुल 99 रामस्र स्थल घोषित किए जा चुके हैं और उत्तर प्रदेश 12 स्थलों के साथ पूरे देश में दूसरे स्थल पर है। इस नवीन आर्द्रभूमि के जुड़ने से पर्यटन क्षेत्रों में तैजी से वृद्धि होने की सम्भावना है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था मज्बबूत होगी। 1971 ईरान के रामस्र सम्मेलन के तहत विभिन्न प्रजातियों और विशेषकर प्रवासी पक्षीए वं जैव विविधता संरक्षण को तीव्र गति मिलेगी। प्रदेश के सभी रामस्र स्थलों का कुल क्षेत्रफल अब 39914ण्27 हेक्टेयर हो गया है जो कुल आर्द्रभूमि क्षेत्र का 3ण्21 प्रतिशत है जो जैव सुरक्षा व आर्द्रभूमि संरक्षण को मजबूती प्रदान करेगा।
Leave a comment