A First-Of-Its-Kind Magazine On Environment Which Is For Nature, Of Nature, By Us (RNI No.: UPBIL/2016/66220)

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रूफटॉप बोरिंग, बोरा बांध विधि व नहरों के माध्यम से हल संभव

TreeTake is a monthly bilingual colour magazine on environment that is fully committed to serving Mother Nature with well researched, interactive and engaging articles and lots of interesting info.

रूफटॉप बोरिंग, बोरा बांध विधि व नहरों के माध्यम से हल संभव

यदि एक छोटे जिले में अगर १ लाख मकान होंगे तो आप समझ सकते हैं कि लगभग ८ अरब लीटर पानी जमीन में भेजकर अंडरग्राउंड वाटर लेवल प्रतिवर्ष किस हद तक बढ़ाया जा सकता है। फिर एक शहर में कितनी सरकारी व गैर सरकारी इमारतें होती हैं जिनमें रेनवाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से भूजल स्तर को बढ़ायाजा सकता है..

रूफटॉप बोरिंग, बोरा बांध विधि व नहरों के माध्यम से हल संभव

Tell-All

We Asked: It is raining cats and dogs, but how much water conservation effort do you see around you by both private and public sectors? What immediate efforts must be done by us to save all that precious water which is uselessly flowing away and flooding cities?


हमारे देश में बाढ़ एक स्थायी रूप से प्रतिवर्ष होने वाली प्राकृतिक आपदा बन चुकी है जिसको रोकने या नियंत्रित करने के सभी प्रयास आज तक विफल हुए हैं । अत्यधिक पानी के कारण कहते हैं कि समुद्र के किनारे का पानी भी मीठा हो गया है। बहरहाल, बाढ़ से होने वाले नुक्सान के अनुमान में न जाकर यह विचार करना आवश्यक है कि क्या बाढ़ की विभीषिका को नियंत्रित किया जा सकता है? सामान्यतः बाढ़ के दो कारण है कि अत्यधिक बारिश से नदियों के स्तर का बढ़ जाना जिससे उनका ओवरफ्लो हो कर शहरों में अपना पानी लेकर घुस जानाय दूसरा, इन्ही शहरों में अत्यधिक बारिश होने के कारण चरमराई हुई जल निकासी की व्यवस्था के कारण जगह जगह जलभराव होना।  वास्तव में शहरों में बरसने वाला जल भी नदियों कि बाढ़ में मिलकर पानी कि मात्रा बहुत बढ़ा देता है जिसके कारण एक शहर का पानी नदी में मिलकर दूसरे शहर के लिए बाढ़ का खतरा बढ़ा देता है। आश्चर्य यह है कि बाढ़ या बारिश से  मिलने वाले मीठे पानी को संचय करने का कोई खास प्रयास नहीं किया जाता जिससे ये सारा पानी समुद्र में मिलकर खारा हो जाता है। बाढ़ कि स्थिति से निपटने के लिए यद्यपि एक सुदृढ़ कार्य योजना की आवश्यकता है जो एक लम्बी समयावधि में पूरी हो सकेगी लेकिन कुछ ऐसे उपाय है जो बाढ़ के पानी का कुछ अंश रोक कर तत्काल प्रभाव से भूजल स्तर को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। १- छोटे-छोटे घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग (रूफटॉप बोरिंग) के माध्यम से अरबों लीटर पानी जमीन में भेजा जा सकता है जिससे जमीन के नीचे जल स्तर बढ़ेगा तथा दूसरी तरफ शहर में वर्षा जल के कारण होने वाली जलभराव कि समस्या नहीं होगी । इसका एक सीधा सा गणित हम समझ सकते हैं: एक १० मीटर बाई १० मीटर की मकान की छत पर प्रतिवर्ष लगभग ८५ हजार लीटर वर्षा का जल रूफटॉप बोरिंग से जमीन के अंदर भेजा जा सकता है। यदि एक छोटे जिले में अगर १ लाख मकान होंगे तो आप समझ सकते हैं कि लगभग ८ अरब लीटर पानी जमीन में भेजकर अंडरग्राउंड वाटर लेवल प्रतिवर्ष किस हद तक बढ़ाया जा सकता है। फिर एक शहर में कितनी सरकारी व गैर सरकारी इमारतें होती हैं जिनमें रेनवाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से अरबों लीटर पानी भूजल स्तर को बढ़ने में सहायक हो सकता है। इससे न केवल प्रत्येक शहर में जल की आपूर्ति की समस्या का हल संभव हो सकेगा बल्कि ये जल बाढ़ के जल में न मिलकर अन्य शहरों में बाढ़ की विभीषिका को कम करेगा। २- नदियों के अत्यधिक जल स्तर बढ़ने को प्राकृतिक आपदा का रूप दे दिया जाता है जो कि वास्तव में यह है भी। बाढ़ से रौद्र रूप अपनाने वाली नदियों को चिन्हित कर मनरेगा के माध्यम से यदि एक या दो नहरें खुदवा कर पहले से ही सूखी नदियों से जोड़ दिया जाय तो निश्चित से बाढ़ के पानी को सूखे क्षेत्रों में डाइवर्ट किया जा सकता है। पुनः छोट्वे छोटे रजवाहों के माध्यम से बाढ़ का जल गांव की तरफ भेजा जा सकता है जहां रजवाहे के किनारे तालाब खुदवा कर उनको बाढ़ के पानी से भरा जा सकता है। इसके तीन फायदे होंगेः बाढ़ का जल सूखे क्षेत्रों में बात जायगाय तालाबों में मीठा पानी रोका जा सकेगा और गावों में भूजल स्तर बाढ़ सकेगा जिससे वर्षभर सिंचाई का जल उपलब्ध रहेगा तथा वर्तमान में भूजल दोहन होने से बचेगा और ये भविष्य में रिजर्व संसाधन के रूप में काम आ सकेगा। पुनः बाढ़ के जल के कारण खेतों में बहने वाली मिटटी को बोरा बांध विधि से रोका जा सकता है। बोरा बांध एक ऐसी विधि है कि खेतों की मिटटी को जूट के बोरोन में भरकर खेत की मेंढ़ बना दी जाती है जिससे यह एक दीवार का काम करती है और जलभराव में भी खेत कि मिटटी नहीं बह पाती। जहां तक उक्त सब योजनाओं के लिए धन की आवश्यकता है, उन्हें मनरेगा द्वारा पूरा किया जा सकता है जिससे योजना भी पूर्ण होगी और ग्रामीणों को रोजगार भी मिलेगा। सभी योजनाएं काम अवधि में पूर्ण होने वाली हैं जिनमें नगर पंचायत, जिला पंचायत, ग्राम पंचायत व आम नागरिक भी सहभागिता कर सकते हैं। -डॉ वशिष्ठ भरद्वाज, जल संरक्षण पर शोधरत, मुजफ्फरनगर

 

Human kind is bestowed with endless gifts by mother nature in the form of breathable air, water and everything which makes life possible on this earth. And water as they say is the driving force of all nature which needs to be saved and conserved. Conserving rain water or rain water harvesting, as it is popularly called, can go a long way in saving the priceless blessing of the Almighty. A lot of water gets wasted due to lack of proper conservation methods and as vigilant citizens it is our duty to preserve water and to prevent it from getting wasted. The Prime Minister of India has also urged the civilians to conserve water under the Jal Shakti campaign. As responsible citizens we must reduce wastage by channeling of rain water into water tanks of the colonies and apartments. This water can be used for washing cars, cleaning toilets and other domestic purposes. This water can also be used for watering of plants and cleaning in restaurants and other such outlets which require regular supply of water.  Such simple steps taken by us can go a long way in rain water harvesting and promoting the concept of ‘reduce, reuse and recycling of water.’ - Dr Sanobar Haider, Assistant Professor, Department of History, Maharaja Bijli Pasi Government PG College, Lucknow

Topic of the month: A dog’s life is no ‘catwalk’! Say how must people pitch in and help strays on roads, especially when they are sick or have a litter. Also, who must come forward for their welfare steps like sterilization, even food, water and shelter? Packing them all to a shelter home is no solution, so how best can we deal with this situation? You may send your views (either in Hindi or English) in 300 words at [email protected] Please also attach a colour photo of yourself.

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